ओवैसी का ममता बनर्जी पर बड़ा हमला बंगाल की राजनीति में बढ़ा तनाव

एआईएमआईएम प्रमुख और हैदराबाद से लोकसभा सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी ने राज्य के मुस्लिम समुदाय के साथ “यूज एंड थ्रो” यानी इस्तेमाल करो और छोड़ दो जैसी नीति अपनाई है। ओवैसी ने यह बयान एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में दिया, जिसके बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।
ओवैसी का दावा ममता बनर्जी ने भाजपा को मजबूत करने में भूमिका निभाई
ओवैसी ने अपने बयान में यह भी कहा कि ममता बनर्जी वही नेता हैं जिन्होंने पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को मजबूत करने में अप्रत्यक्ष भूमिका निभाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भाजपा की जड़ें जमाने में तृणमूल कांग्रेस की नीतियों का भी योगदान रहा है। ओवैसी ने यह भी कहा कि 1977 में भाजपा के पास बहुत कम विधायक थे, लेकिन आज स्थिति बदल गई है और इसके पीछे राजनीतिक परिस्थितियों की भूमिका रही है।

मुस्लिम वोट बैंक और राजनीतिक आरोपों पर बढ़ा विवाद
ओवैसी लंबे समय से इस आरोप का सामना करते रहे हैं कि वे मुस्लिम वोटों को विभाजित करके भाजपा को फायदा पहुंचाते हैं, जिसे कई राजनीतिक दल उन्हें “बी-टीम” कहकर संबोधित करते हैं। बंगाल में भी उन पर इसी तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं, खासकर जब वे तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता हुमायूं कबीर का समर्थन कर रहे हैं। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए ओवैसी ने कहा कि जब लोग उनसे चुनाव लड़ने का कारण पूछते हैं, तो उन्हें यह भी याद रखना चाहिए कि अतीत में मुस्लिम समुदाय के साथ क्या हुआ था और क्यों अब राजनीतिक भागीदारी जरूरी है।
“मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभाव” के आरोप से बढ़ा सियासी विवाद
ओवैसी ने अपने बयान में और भी कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि ममता बनर्जी की सरकार मुस्लिम समुदाय के साथ भेदभावपूर्ण रवैया अपनाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय को सिर्फ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया जाता है और बाद में उन्हें नजरअंदाज कर दिया जाता है। ओवैसी ने यह भी कहा कि जैसे पशुओं का उपयोग किया जाता है, वैसे ही मुस्लिम वोट बैंक का राजनीतिक इस्तेमाल किया जाता है, जिसके बाद उन्हें किनारे कर दिया जाता है। इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में एक नया विवाद खड़ा हो गया है और सभी दलों की प्रतिक्रियाएं सामने आने की संभावना है।